हिंडनबर्ग के भंवर में अडानी, LIC का हुआ बंटाधार, बीमा कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अडानी समूह और उसके शेयरधारकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एलआईसी की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। एलआईसी के शेयरों में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एलआईसी के शेयर सोमवार को तीन प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बीमा कंपनी के शेयर सोमवार के कारोबार में 3.19 प्रतिशत टूटकर 566 रुपये के स्तर पर आ गए। इसके साथ ही एलआईसी के शेयर पिछले दिन के बंद 584.65 रुपये के मुकाबले सोमवार को फिसलकर अपने 52 वीक के निचले स्तर पर पहुंच गए।

LIC को कितना नुकसान हुआ है?

अडानी समूह में एलआईसी ने अच्छा खासा निवेश कर रखा है। निवेश के संबंध में एलआईसी की ओर से 30 जनवरी को जानकारी दी गई थी। एलआईसी ने बताया था कि अडानी समूह उसका दिसंबर के अंत तक इक्विटी और कर्ज के तहत 35,917 करोड़ रुपये हैं। बीमा कंपनी के मुताबिक, सभी कंपनियों में इक्विटी का कुल खरीद वैल्यू 30,127 करोड़ रुपये है। 27 जनवरी 2023 को इसका मार्केट वैल्यू 56,142 करोड़ रुपये था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 फरवरी को यह घटकर 27,000 करोड़ रुपये पर आ गया था। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से बीते एक महीने में एलआईसी का घाटा तेजी से बढ़ा है।

LIC के शेयर क्यों गिर रहे हैं?

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से अडानी समूह का बुरा है। उसके शेयर धराशाई हैं। इसका असर एलआईसी के शेयर पर भी पड़ा है। मार्केट्समोजो के मुख्य निवेश अधिकारी सुनील दमानिया के मुताबिक, अडानी के शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव की वजह से एलआईसी के शेयरों की कीमत गिरी है। साल-दर-साल (YTD) आधार पर शेयर में 19.96 प्रतिशत की गिरावट आई है।

LIC का अडानी समूह में कितना निवेश है?

अडानी समूह की कई कंपनियों में एलआईसी ने निवेश कर रखा है। अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी ग्रीन एनर्जी, अदानी पोर्ट्स, दानी टोटल गैस, अदानी ट्रांसमिशन, अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी में एलआईसी का निवेश है। एलआईसी द्वारा बीएसई को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, उसका सबसे ज्यादा निवेश अडानी पोर्ट में है। इस कंपनी में उसकी हिस्सेदारी 9.1 प्रतिशत है। वहीं, 6 कंपनियों में 1.25 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी है।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में क्या है?

अमेरिका की फॉरेंसिक फाइनेशियल रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में अडानी ग्रुप के सभी कंपनियों के लोन पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि अडानी ग्रुप की 7 प्रमुख लिस्टेड कंपनियां 85 फीसदी से ज्यादा ओवरवैल्यूज हैं। रिपोर्ट में अडानी ग्रुप से 88 सवाल किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद अडानी के शेयर धराशाई हो गए। शेयर बाजार में भूचाल आ गया। रिपोर्ट आने के बाद से अभा तक अडानी समूह और उसके शेयरधारकों की मश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

 

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