Turkey Earthquake: बांग्लादेश की लेखिका,मानवाधिकार कार्यकर्ता और भारत में निर्वासन में रह रहीं तस्लीमा नसरीन(Taslima Nasreen) ने ट्वीट कर दुनिया भर के उन कट्टरपंथियों पर तंज कर प्रहार किया है कि तुर्की में आया विनाशकारी भूकंप अल्लाह की दी हुई सजा है! वास्तव में इसका अल्लाह से कोई लेना-देना नहीं।
जानें क्या है मामला
आपको बता दें इस साल की शुरुआत 21जनवरी को स्वीडन के अंदर तुर्की दूतावास के सामने प्रदर्शनकारियों ने कुरान(Quran) को जला दिया था। प्रदर्शनकारियों में शामिल दानिश कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी के नेता रैसमस पालुदन ने ही कुरान को जलाया था। कहा जाता है कि इससे पहले भी यह स्वीडिश नागरिक कुरान की कॉपियां जला चुका है। जिसके बाद दुनियाभर के कई इस्लामिक देशों में स्वीडन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे और उसकी निंदा की थी।
Islamists were saying Allah would punish Sweden as people in Sweden were burning Quran. But instead Allah punished Turkey.
Actually earthquakes occur in earthquake prone areas. It has nothing to do with Allah.— taslima nasreen (@taslimanasreen) February 9, 2023
उस समय स्वीडन में तीन अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। जिसमें एक प्रदर्शन तुर्की के खिलाफ किया जा रहा था, दूसरा नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के खिलाफ तथा तीसरा कुर्दों के समर्थन में हो रहा था। इन प्रदर्शनों को स्वीडन की पुलिस की मंजूरी थी। जिसके कारण ही सबसे अधिक तीखी प्रतिक्रियाएं पाकिस्तान और तुर्की की ओर से आईं थीं। इसके साथ-साथ सऊदी अरब, जॉर्डन तथा कुबैत ने भी निंदा की थी। तुर्की ने स्वीडन के राजदूत को तलब कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाही करने को कहा था।
तस्लीमा ने ट्वीट कर किया तंज
इसके बाद आज लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट कर इन इस्लामिक कट्टरपंथी देशों पर तंज कस लिखा है कि “इस्लामिस्ट कह रहे थे कि अल्लाह स्वीडन को दंड देगा क्योंकि स्वीडन में लोग कुरान जला रहे थे, लेकिन इसके बजाय अल्लाह ने तुर्की को सजा दी। दरअसल भूकंप प्रॉन एरिया में आते हैं। इसका अल्लाह से कोई लेना देना नहीं है।”
स्वीडन सरकार ने की थी निराशा व्यक्त
स्वीडन के खिलाफ इस्लामिक देशों की तरफ से निंदा किए जाने पर स्वीडन सरकार ने भी इस घटना का समर्थन किया था। स्वीडिश विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम ने इस घटना पर व्यक्त कर कहा कि “स्वीडन के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्वीडिश सरकार इस घटना का समर्थन करती है।”