चंद्रयान-3 ने अपने सभी लक्ष्यों को किया हासिल, ISRO ने दी अहम जानकारी

Chandrayaan-3 Mission : भारत के पहले सौर मिशन ‘आदित्य-एल1’ को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) के निदेशक निलेश एम. देसाई ने कहा कि जब हमने इसे 2 सितंबर को लॉन्च किया था तो यह परिवर्ती कक्षा (ट्रांजिशनल ऑर्बिट) में था, लेकिन अब इसकी कक्षा बढ़ा दी है. उन्होंने बताया कि कक्षा बढ़ने के बाद और पृथ्वी की कक्षा से संबंधित प्रक्रिया (ईबीएन) को 4 से 5 बार करने पर, यह सूर्य की ओर बढ़ जाएगी.

‘आदित्य एल1’ को शनिवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था. मिशन का लक्ष्य सूर्य-पृथ्वी ‘एल1’ बिंदु पर भारत की पहली सौर वेधशाला स्थापित कर सूरज के बाहरी वातावरण का अध्ययन करना है. एल1 का मतलब ‘लैग्रेंज प्वॉइंट 1’ है, जहां अंतरिक्ष यान को स्थापित किया जाएगा. सौर पैनल के सक्रिय होने के बाद उपग्रह ने विद्युत ईंधन पैदा करना शुरू कर दिया.

5 सालों तक पृथ्वी पर डाटा भेजता रहेगा आदित्य एल1

एम. देसाई ने आगे कहा, “एल1 प्वॉइंट पर पहुंचने के बाद हम इसे हेलो ऑर्बिट में डाल देंगे जहां से यह लगातार सूर्य का निरीक्षण करेगा और अगले 5 वर्षों तक पृथ्वी पर विभिन्न डेटा भेजेगा… हम इसे 127 दिनों के बाद हेलो ऑर्बिट में डालेंगे…” इसरो के अनुसार, आदित्य-एल1 पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर रहकर सूर्य का अध्ययन करेगा. यह दूरी पृथ्वी और सूर्य की कुल दूरी का लगभग एक प्रतिशत है. अंतरिक्ष एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यान न तो सूर्य पर उतरेगा और न ही सूर्य के और करीब जाएगा.

‘चंद्रयान-3’ ने अपने सभी लक्ष्यों का हासिल किया

भारत के तीसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ को लेकर इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) के निदेशक निलेश एम. देसाई ने सोमवार को बताया कि चंद्रयान-3 मिशन अपने सभी लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाब रहा है. उन्होंने कहा कि इस मिशन के तीन मुख्य उद्देश्य – 1. चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग, 2. चंद्रमा की सतह पर चलने के लिए रोवर को सक्रिय करना और 3. वैज्ञानिक प्रयोग करना था.

उन्होंने आगे कहा, “पहले दो उद्देश्यों को 23 और 24 अगस्त को ही हासिल कर लिया था. इसके बाद हम पिछले 10-11 दिनों से अपने तीसरे उद्देश्य पर काम कर रहे थे और हम इसमें सफल रहे हैं. निष्कर्ष के तौर पर, हमारा मिशन हर तरफ से सफल रहा है… हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं… 3 सितंबर को, हमने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर 14 दिनों की लंबी रात के कारण मिशन को रोक दिया था. 14 दिनों के बाद, हम देखेंगे कि हम और कितना डेटा इकट्ठा कर सकते हैं…”

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