AAP का यूनिफॉर्म सिविल कोड को “समर्थन” 2024 के लिए विपक्षी एकता को झटका?

आम आदमी पार्टी (आप) ने सैद्धांतिक रूप से देशवासियों के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करने का ऐलान किया है. पार्टी ने कहा है कि समान नागरिक संहिता देश के लिए बेहद आवश्यक है और इसे लाने से सभी समुदायों को एक समान मंच पर लाने में सफलता मिलेगी। उसका यह कदम विपक्षी दलों की एकता के लिए तगड़ी चोट साबित हो सकता है।

अरविंद केजरीवाल विपक्ष की अपनी पारंपरिक राजनीति से अलग स्टैंड लेने के लिए जाने जाते रहे हैं। इसके पहले भी उन्होंने राम मंदिर और संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के मुद्दे का समर्थन किया था। इसके लिए उन्हें विपक्ष के दूसरे दलों का कड़ा विरोध भी झेलना पड़ा था। लेकिन अपनी राजनीति की अलग पिच तय करते हुए अरविंद केजरीवाल ने इन मुद्दों का समर्थन किया था।

उमर अब्दुल्ला ने विपक्षी दलों की एकता बैठक के दौरान भी अरविंद केजरीवाल पर इसी बात पर हमला बोला था कि उन्होंने धारा 370 की समाप्ति पर इसे देशहित में लिया गया फैसला बताया था, लेकिन आज जब उनके खिलाफ दिल्ली अध्यादेश का मामला आ गया है तब वे सभी विपक्षी दलों से इसके खिलाफ समर्थन मांग रहे हैं। कथित तौर पर इसी कारण अरविंद केजरीवाल को विपक्षी दलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया था।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की यूसीसी पर की गई टिप्पणी की मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि समान संहिता को ‘एजेंडा-संचालित बहुसंख्यकवादी सरकार’ द्वारा लोगों पर थोपा नहीं जा सकता है. साथ ही चेतावनी भी दी है कि “विभाजन बढ़ेगा”.

इस टिप्पणी पर मुस्लिम संगठनों की ओर से भी कड़ा ऐतराज जताया गया है. देश की शीर्ष मुस्लिम संस्था, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मंगलवार रात एक आपातकालीन बैठक की, जिसमें चर्चा की गई कि वह यूसीसी पर कैसे प्रतिक्रिया दें. बोर्ड के सदस्य और जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने आज एनडीटीवी को बताया कि सरकार ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं और मुसलमानों से इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में सड़कों पर नहीं उतरने का आग्रह किया है. हालांकि, इस मुद्दे पर आप का रुख कांग्रेस के साथ उसके टकराव की पृष्ठभूमि में भी सामने आता है.

2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए पिछले सप्ताह पटना में विपक्ष की बैठक के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि आप के लिए किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनना बहुत मुश्किल होगा जिसमें कांग्रेस भी शामिल है. ऐसा तब तक है जब तक कांग्रेस दिल्ली में केंद्र द्वारा लाए गए अध्यादेश का विरोध नहीं करती.

उनका कहना है कि केंद्र का अध्यादेश दिल्ली में नौकरशाहों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है. इस अध्यादेश में कहा गया है कि इसका उद्देश्य सेवाओं के प्रशासन की एक व्यापक योजना प्रदान करना है जो भारत के राष्ट्रपति के माध्यम से प्रतिबिंबित पूरे देश की लोकतांत्रिक इच्छा के साथ दिल्ली के लोगों के स्थानीय और घरेलू हितों को संतुलित करता है.

यह अध्यादेश पिछले महीने दिल्ली सरकार के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि राजधानी की सरकार कानून बनाने और नागरिक सेवाओं का प्रबंधन करने के लिए स्वतंत्र है. इस आदेश में आगे कहा गया था कि केंद्रीय नियुक्त उपराज्यपाल का नियंत्रण सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि तक ही सीमित रहेगा. AAP ने अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

 

 

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