नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र में मणिपुर में हिंसा के कारण गतिरोध पिछले कुछ दिनों से जारी है. विपक्षी दलों ने मणिपुर की स्थिति को लेकर सोमवार को संसद में संयुक्त रूप से प्रदर्शन करने की योजना बनाई है. विपक्ष की मांग है कि संसद में मणिपुर मुद्दे पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बयान दें, जबकि सरकार लगातार जोर दे रही है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी नहीं बल्कि केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह बोलेंगे. संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है, लेकिन मणिपुर में जातीय हिंसा को लेकर सदन में लगातार हंगामा हो रहा है.
संसद भवन में गांधी प्रतिमा के सामने विपक्षी सांसदों का मणिपुर हिंसा को लेकर प्रदर्शन. राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, प्रियंका चतुर्वेदी, महुआ मांजी, मनोज झा, रंजीत रंजन, सुप्रिया सुले इस प्रदर्शन में शामिल हैं. इन सांसदों ने प्रधानमंत्री से सदन के अंदर मणिपुर हिंसा को लेकर बयान देने की मांग की और कहा कि मणिपुर की सरकार को बर्खास्त करना चाहिए.
राजस्थान BJP के सांसदों (Rajasthan BJP MPs) ने संसद में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन (protest) किया. यह विरोध प्रदर्शन राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार और अपराध (Rising atrocities and crimes against women) के मुद्दे पर है. BJP सांसद सीपी जोशी ने कहा कि हमारी मांग है कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को राज्य में महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पाने के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए. पिछले कुछ सालों में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं.
वहीं राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार और अपराध के खिलाफ बीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि हम राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के इस्तीफे की मांग करते हैं. दलितों पर अत्याचार को रोकने की जरूरत है. अत्याचार काफी बढ़ गए हैं और इसलिए हम यहां संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही आरंभ होने से पहले सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मणिपुर के विषय पर संसद के भीतर वक्तव्य देना चाहिए, क्योंकि इस समय पूर्वोत्तर का यह राज्य इसका इंतजार कर रहा है और पूरा देश उनकी ओर देख रहा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की यह मांग भी है कि समाधान की सामूहिक इच्छा को व्यक्त करने के लिए सदन में चर्चा हो.