नयी दिल्ली। कांग्रेस समेत विपक्ष के 19 दलों ने बुधवार को कहा कि वे संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का सामूहिक बहिष्कार करेंगे क्योंकि इस सरकार में संसद से लोकतंत्र की आत्मा को निकाल दिया गया है। उन्होंने एक संयुक्त बयान में यह आरोप भी लगाया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उद्घाटन समारोह से दरकिनार करना और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद के नए भवन का उद्घाटन करने का फैसला लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल और कई अन्य विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान जारी किया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन करेंगे।
बीजेपी ने किया पलटवार
मोदी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की आदत है कि जहां नहीं होता, वहां भी विवाद पैदा करती है। पुरी ने कहा कि राष्ट्रपति देश और पीएम सरकार के प्रमुख हैं। पीएम सरकार की तरफ से संसद का नेतृत्व करते हैं। उनकी नीतियां कानून के तौर पर लागू होती हैं। हरदीप पुरी ने कहा कि राष्ट्रपति किसी भी सदन के सदस्य नहीं होते, पीएम सदसय् होते हैं। उन्होंने कहा कि अगस्त 1975 में तब की पीएम इंदिरा गांधी ने संसद एनेक्सी का उद्घाटन किया था। पीएम रहते राजीव गांधी ने 1987 में संसद की लाइब्रेरी का उद्घाटन किया था। फिर हमारी सरकार के प्रमुख ऐसा क्यों नहीं कर सकते।
नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होना है। इससे पहले संसद भवन का शिलान्यास भी पीएम मोदी ने किया था। उन्होंने संसद भवन के ऊपर भारत के राजचिन्ह का भी अनावरण किया था। इस पर भी विपक्ष ने जमकर विरोध जताया था। मोदी पिछले दिनों नए संसद भवन को देखने गए थे। वहां उन्होंने इसे बनाने वाले कामगारों से बातचीत भी की थी। तब भी विपक्ष की तरफ से सवाल खड़े किए गए थे। अब राष्ट्रपति से उद्घाटन न कराने को विपक्ष ने मुद्दा बनाया है। खास बात ये है कि नए संसद भवन को बनाने का आग्रह लोकसभा और राज्यसभा की तरफ से आया था। जिसके बाद मोदी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया।