BIG-NEWS : राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म

नई दिल्ली: राहुल गांधी को लेकर बड़ी खबर आ रही है. कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी को उनकी मोदी सरनेम टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने की तारीख से लोकसभा के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया है.

सांसद की अयोग्यता के मसले पर क्या है कानून प्रावधान ?

सांसद और विधायक कई मामलों में अदालत से दोषी और सजा पाने के बाद अपनी सदस्यता खो देते हैं और सजा की अवधि पूरी करने के बाद 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य भी होते हैं.

सवाल उठता है कि क्या सिर्फ 2 साल से अधिक सजा पाए जाने के बाद ही सांसद और विधायक की सदस्यता खत्म होती है और वो 6 साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाते है? ऐसा नहीं है, दरअसल कुछ मामलों में सिर्फ दोषी पाए जाने और फाइन देकर छूट जाने के बाद भी सांसद और विधायक की सदस्यता खत्म हो जाती है.

जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 8 में दोषी नेताओं, सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान है. इस अधिनियम की धारा 8(1) के अंतर्गत प्रावधान है कि यदि कोई विधायिका सदस्य सांसद अथवा विधायक बलात्कार, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन; धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना, प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त होता है, तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा और कोर्ट की तरफ से सिर्फ हर्जाना और जेल की सजा होने पर वो अपनी सांसद और विधायक की सदस्यता को खो देगा और 6 वर्ष की अवधि के लिये चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा.

इस अधिनियम की धारा 8 (2) में प्रावधान है की कालाबाजारी, मुनाफाखोरी, मिलावटखोरी और दहेज से जुड़े मामले में 6 महीने से अधिक की सजा पाता है तो वो अपनी विधायक और सांसद की सदस्यता खो देगा और सजा पूरी करने के बाद 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने के अयोग्य रहेगा.

इस अधिनियम की धारा 8 (3) में प्रावधान है कि किसी भी अन्य अपराध के लिये दोषी ठहराए जाने वाले किसी भी विधायिका सदस्य को यदि दो वर्ष या दो साल से अधिक के कारावास की सज़ा सुनाई जाती है तो उसे दोषी ठहराए जाने की तिथि से आयोग्य माना जाएगा. ऐसे व्यक्ति को सज़ा पूरी किये जाने की तिथि से 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य माना जाएगा.

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