प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सवेरे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर बजट उपरांत वेबिनार के आरंभिक सत्र को संबोधित किया । वेबिनार का उद्देश्य महिलाओं के स्वामित्व और महिलाओँ द्वारा संचालित व्यापारिक उद्यमों को प्रोत्साहन देना है। केंद्र की 2023-24 की बजट घोषणाओं को लागू करने में यह वेबिनार सहायक होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन
हम सभी के लिए ये खुशी की बात है कि इस वर्ष के बजट को देश ने 2047 तक, विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की पूर्ति के एक शुभारंभ के रूप में देखा है। बजट को भावी अमृतकाल की दृष्टि से देखा और परखा गया है। ये देश के लिए शुभ संकेत है कि देश के नागरिक भी अगले 25 वर्षों को, इन्हीं लक्ष्यों से जोड़कर देख रहे हैं।
साथियों,
बीते 9 वर्षों में देश Women Led Development के विज़न को लेकर आगे बढ़ा है। भारत ने अपने बीते वर्षों के अनुभव को देखते हुए, Women Development से Women Led Development के प्रयासों को वैश्विक मंच पर भी ले जाने का प्रयास किया है। इस बार भारत की अध्यक्षता में हो रही G20 की बैठकों में भी ये विषय प्रमुखता से छाया हुआ है। इस वर्ष का बजट भी Women Led Development के इन प्रयासों को नई गति देगा, और इसमें आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है। मैं इस बजट वेबिनार में आप सभी का स्वागत करता हूं।
साथियों,
नारीशक्ति की संकल्पशक्ति, इच्छाशक्ति, उनकी कल्पना शक्ति, उनकी निर्णय शक्ति, त्वरित फैसले लेने का उनका सामर्थ्य निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उनकी तपस्या, उनके परिश्रम की पराकाष्ठा, ये हमारी मातृशक्ति की पहचान है, ये एक प्रतिबिंब हैं। जब हम Women Led Development कहते हैं तब उसका आधार यही शक्तियां हैं। मां भारती का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने में, नारीशक्ति का ये सामर्थ्य भारत की अनमोल शक्ति है। यही शक्तिसमूह इस शताब्दी में भारत के स्केल और स्पीड को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है।
साथियों,
आज हम भारत के सामाजिक जीवन में बहुत बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन महसूस कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जिस प्रकार Women Empowerment के लिए काम किया है, आज उसके परिणाम नजर आने लगे हैं। आज हम देख रहे हैं कि भारत में, पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। पिछले 9-10 वर्षों में हाइस्कूल या उसके आगे की पढ़ाई करने वाली लड़कियों की संख्या तीन गुना बढ़ी है। भारत में साइन्स, टेक्नालजी, इंजीन्यरिंग और मैथ्स में लड़कियों का enrolment आज 43 परसेंट तक पहुंच चुका है, और ये समृद्ध देश, विकसित देश अमेरिका हो, यूके हो, जर्मनी हो इन सबसे भी ज्यादा है। इसी तरह, मेडिकल फील्ड हो या खेल का मैदान हो, बिज़नस हो या पॉलिटिक्ल एक्टिविटी हो, भारत में महिलाओं की केवल भागीदारी नहीं बढ़ी है, बल्कि वो हर क्षेत्र में आगे आकर नेतृत्व कर रहीं हैं। आज भारत में ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जिनमें महिलाशक्ति का सामर्थ्य नजर आता है। जिन करोड़ों लोगों को मुद्रा लोन दिये गए, उनमें से करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी देश की महिलाएं हैं। ये करोड़ों महिलाएं अपने परिवार की आय ही नहीं बढ़ा रही हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था के नए आयाम भी खोल रही हैं। पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से बिना गारंटी आर्थिक मदद देना हो, पशुपालन को बढ़ावा देना हो, फिशरीज को बढ़ावा देना हो, ग्रामोद्योग को बढ़ावा देना हो, FPO’s हों, खेल-कूद-स्पोर्ट्स हो, इन सभी को जो प्रात्साहन दिया जा रहा है, उसका सर्वाधिक लाभ और अच्छे से अच्छे परिणाम महिलाओं के द्वारा आ रहे हैं। देश की आधी आबादी के सामर्थ्य से हम देश को कैसे आगे ले जाएं, हम नारीशक्ति के सामर्थ्य को कैसे बढ़ाएं, इसका प्रतिबिंब इस बजट में भी नजर आता है। महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट स्कीम, इसके तहत महिलाओं को 7.5 परसेंट इंटरेस्ट रेट दिया जाएगा। इस बार के बजट में पीएम आवास योजना के लिए करीब 80 हजार करोड़ रुपए रखे गए हैं। ये राशि, देश की लाखों महिलाओं के लिए घर बनाने में काम आएगी। भारत में बीते वर्षों में पीएम आवास योजना के जो 3 करोड़ से अधिक घर बने हैं, उनमें से अधिकांश महिलाओं के ही नाम हैं। आप कल्पना कर सकते हैं वो भी एक जमाना था जब महिलाओं के लिए न तो कभी खेत उनके नाम होते थे, न खलिहान उनके नाम होते थे,ना दुकान होती थी, ना घर होते थे। आज इस व्यवस्था से उन्हें कितना बड़ा सपोर्ट मिला है। पीएम आवास ने महिलाओं को घर के आर्थिक फैसलों में एक नई आवाज दी है।
साथियों,
इस बार के बजट में नए यूनिकॉर्न्स बनाने के लिए, अब हम स्टार्टअप की दुनिया में तो यूनिकार्न सुनते हैं लेकिन क्या सेल्फ हेलप ग्रुप में भी ये संभव है क्या? ये बजट उस सपने को पूरा करने के लिए सपोर्ट करने वाली घोषणा लेकर के आया है। देश के इस विज़न में कितना स्कोप है, ये आप बीते वर्षों की ग्रोथ स्टोरी में देख सकते हैं। आज देश में पाँच में से एक नॉन-फ़ार्म बिज़नस महिलाएं संभाल रहीं हैं। बीते 9 वर्षों में सात करोड़ से ज्यादा महिलाएं सेल्फ़ हेल्प ग्रुप्स में शामिल हुईं हैं, और वो अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहीं हैं। ये करोड़ों महिलाएं कितना वैल्यू creation कर रहीं हैं, और इसका अंदाजा आप इनकी कैपिटल requirement से भी लगा सकते हैं। 9 वर्षों में इन सेल्फ़ हेल्प ग्रुप्स ने सवा 6 लाख करोड़ रुपए का लोन लिया है। ये महिलाएं केवल छोटी entrepreneur ही नहीं हैं, बल्कि ये ग्राउंड पर सक्षम रिसोर्स पर्सन्स का काम भी कर रहीं हैं। बैंक सखी, कृषि सखी, पशु सखी के रूप में ये महिलाएं गाँव में विकास के नए आयाम बना रही हैं।
साथियों,
सहकारिता क्षेत्र, उसमें भी महिलाओं की हमेशा बड़ी भूमिका रही है। आज कॉपरेटिव सेक्टर में आमूलचूल बदलाव हो रहा है। आने वाले वर्षो में 2 लाख से ज्यादा मल्टी-पर्पस कॉपरेटिव, डेयरी कॉपरेटिव और फिशरीज कॉपरेटिव बनाये जाने वाले हैं। 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग से, प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें महिला किसानों और producer ग्रुप्स की बड़ी भूमिका हो