Bihar Politics: महाराष्ट्र में उठा सियासी बवाल अबतक थमा नहीं है कि अब नया तूफान बिहार की राजनीति में आने लगा है। बिहार की राजनीति में होने वाले बड़े बदलाव के संकेत देखने को मिल रहे है। जब से बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ लैंड स्कैम घोटाले में चार्जशीट दाखिल हुई है उसके बाद से ही नीतीश कुमार ने अपना रुख भी बदल लिया है।
इसी बीच एक ऐसी घटना बिहार में हुई है जिसके बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने की अटकलें तेज हो गई है। ये घटनाएं बिहार में बीते 48 घंटों में हुई है, जिसमें एक सीक्रेट बैठक भी शामिल है। इस बैठक के बाद से कई तरह की अटकलें सामने आने लगी है। साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री और हरिवंश की मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में अकटलों का बाजार तेज हो गया है। बता दें कि हरिवंश नीतीश कुमार के करीबी हैं ही मगर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी बेहद करीबी माने जाते है। हरिवंश नारायण जनता दल यूनाइटेड से राज्यसभा सांसद हैं।
नीतीश ने की हरिवंश के साथ बैठक
बिहार की राजनीति में 3 जुलाई को अहम बैठक हुई है, जो कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के बीच हुई है। डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक के बाद से अटकलें लगाई जा रही है कि नीतीश कुमार की एनडीए में जल्द ही वापसी हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि नीतीश कुमार आरजेडी को संकट में देखते हुए एक बार फिर से एनडीए का हिस्सा बन सकते है। इस संबंध में नीतीश कुमार ने अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है। हालांकि जेडीयू के नेता ने कहा कि है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। ये मुलाकात बीजेपी के साथ जाने का संकेत नहीं है। इस संबंध में बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि हरिवंश बाबू पार्टी के रैंक के साथ है। दोनों नेताओं ने मुलाकात की है, जिसमें कुछ गलत नहीं है। इसे लेकर बयानबाजी करना सही नहीं है।
जेडीयू और आरजेडी मिलन के वक्त भी थी चर्चा
एनडीए छोड़ कर दूसरी बार नीतीश कुमार ने जब आरजेडी से हाथ मिलाया, तब भी हरिवंश की चर्चा हुई थी। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि 2017 में जेडीयू महागठबंधन से अलग नहीं होता। तीन लोगों के दबाव में नीतीश कुमार को महागठबंधन से अलग होने का फैसला लेना पड़ा। पत्रकारों की महफिल में ललन सिंह ने उन तीन लोगों के नाम भी गिनाए। उनमें पहला नाम हरिवंश, दूसरा नाम पत्रकार से राष्ट्रपति के सलाहकार बने अजय कुमार सिंह और तीसरा नाम नीतीश कुमार के अत्यंत विश्वासपात्र मंत्री संजय झा का था। ललन सिंह के मुताबिक इन्हीं तीनों की सलाह पर जेडीयू ने महागठबंधन से रिश्ता तोड़ा था।