शाहजहांपुर (बीएपी संवाद)। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जनपद में विविध प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन ( एमडीए) कार्यक्रम के तहत घर-घर फाइलेरिया की दवा खिलाई जा रही है। इसके अलावा कोई भी व्यक्ति जनपद में स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर दवा का सेवन कर सकता है। जिला मलेरिया अधिकारी ने डॉ. एस.पी. गंगवार के अनुसार 34 लाख लोगों को लक्ष्य मानते हुए सोमवार शाम तक 6 लाख 45 हजार 171 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन एक वर्ष के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमार को छोड़कर सभी को करना है। इसके अलावा सभी को इस दवा का सेवन करना है। 5 वर्ष तक लगातार हर वर्ष एक बार दवा खा लेने से फाइलेरिया से बचने या नियंत्रित करने में पूरी मदद मिलती है। फाइलेरिया की दवा पूरी तरह सुरक्षित है।
उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद हल्का बुखार, पेट दर्द, हाथ पैर में दर्द, सिर दर्द जी मिचलाना या उल्टी-चक्कर आए तो घबराएं नहीं। पानी पिए, खुले में कुछ देर आराम करें और ज्यादा परेशानी होने पर पास के स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक को दिखाएं। ऐसा शरीर में फाइलेरिया के परजीवी होने से हो सकता है, जो दवा खाने के बाद मरते हैं। ऐसी प्रतिक्रिया कुछ देर में स्वतः ठीक हो जाती है। यह बीमारी इस मामले में ज्यादा खतरनाक है कि इसके लक्षण ही 10 से 15 वर्ष बाद दिखते हैं और जब दिखते हैं तब इसका कोई खास उपचार नहीं बचता है। वहीं शुरू में संक्रमित व्यक्ति बिना किसी लक्षण के दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित करता रहता है। इस अभियान के तहत जिले की लगभग 34 लाख लक्षित आबादी को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जा रही है।
फाइलेरिया यानी हाथीपांव की विंकलागता से बचाने के लिए आशा और स्वास्थ्य कर्मी घर-घर दवा खिलाने जा रहे है तो सभी उनको पूरा सहयोग दें और दवा का सेवन उनके सामने खुद करे और बच्चों को भी कराएं। उन्होंने बताया हाथीपांव बीमारी का कोई इलाज नहीं है दवा ही बचाव है। इसका मुख्य उद्देश्य आंतो में पाए जाने वाले कीड़ों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और बच्चों में मृदा संचारित कृमि का पूर्ण उन्मूलन प्राप्त करना है। उन्होंने बताया कि खाने से पहले और शौच के बाद हाथों को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। पैरों में चप्पल/जूते अवश्य पहनें। फलोंध्सब्जियों को साफ/सुरक्षित पानी से धोकर ही उपयोग करें।
जिला चिकित्सालय में फाइलेरिया पर हुई चर्चा
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जिला चिकित्सालय में ‘रोल ऑफ एमडीए इन इलेमिनेशन ऑफ लिमफैटिक फाईलेरियासिस’ विषय पर चर्चा हुई। आयोजन के दौरान डॉ. भोला नाथ, विभागाध्यक्ष, सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान, रायबरेली ने फाइलेरिया उन्मूलन विषय पर एवं डॉ. मालती लोधी प्रधानाचार्य, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय शाहजहाँपुर ने मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान एम.बी.बी.एस, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल छात्र/छात्राओं को फाइलेरिया की दवा ( एलबेंड़ाजोल और डीईसी ) का सेवन कराया गया। उन्होंने बताया कि परजीवी कीड़े लोगों एवं जानवरों के लिए खतरा है। बच्चों में बाहर खेलते समय मिट्टी के संपर्क में आने से कृमि के संक्रमण को रोकना असम्भव है। कृमि संक्रमण बच्चों का जीवन प्रभावित करता है और उनके शारीरिक व मानसिक विकास को अवरुद्ध कर सकता है। कार्यक्रम का आयोजन सामुदायिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश सिंह के निर्देशन में फाइलेरियेसिस कमेटी के नोडल डॉ. सोम नाथ और इसके सदस्य डॉ. सौमित्र स्वरुप सिन्हा ने सफल संचालन किया।