शाहजहांपुर (बीएपी संवाद)। जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। जनपदवासियों को घर पर दवा खिलाने के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। इसके अलावा 10 फरवरी से शुरू होने जा रहे सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) राउंड को सफल बनाने को लेकर सीएचसी-पीएचसी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग के इस कार्य में पीसीआई संस्था सहयोग कर रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एस.पी.गंगवार ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि फाइलेरिया की दवा का सेवन खाली पेट नहीं कराना है। फाइलेरिया की दवा लोगों को उनकी उम्र के हिसाब से दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि दो से पांच साल तक की उम्र के बच्चों को एल्बेंडाजोल एवं डीइसी की एक-एक गोली देनी है। जबकि पांच से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एल्बेंडाजोल की एक गोली एवं डीइसी की दो गोली देनी है। वहीं 15 से अधिक आयु वालों को एल्बेंडाजोल की एक गोली एवं डीइसी की तीन गोली देनी होगी।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में आशा कार्यकर्ताओं को दवा खाने से होने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में भी बताया गया है। उन्हें बताया गया कि यह दवा खाने से शरीर के अंदर मरते हुए कीड़ों की वजह से कभी-कभी सिर दर्द, बुखार, उल्टी, बदन पर चकते एवं खुजली हो सकते हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। यह स्वतः ही ठीक हो जाएगा। यह जानकारी समुदाय के लोगों को समझाकर दवा का सेवन शत प्रतिशत करवाना है।
उन्होंने बताया कि फाइलेरिया की दवा गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को नहीं देनी है। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य कर्मियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी व्यक्ति को दवा घर ले जाने के लिए नहीं देना है, बल्कि सभी को दवा अपने सामने खिलानी है। पीसीआईके डीएमसी मो. खालिद ने बताया कि 10 से 27 फरवरी तक चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र में 377 टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में दो आशा सदस्य हैं।