बिहार जदयू में सियासी भूचाल : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गुस्से को देख मंगलवार को आननफानन में प्रेस कांफ्रेंस कर खुद को उनका (नीतीश कुमार) का सिपाही बताना भी उपेंद्र कुशवाहा के काम नहीं आया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को उपेंद्र कुशवाहा को सीधे-सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया।
साफ कहा- “जिसको जब जाना हो, जितनी जल्दी जाना हो, जितना बोलना है बोलते रहिए और जिस दिन मन करे, उस दिन चले जाइए।” नीतीश ने उपेंद्र कुशवाहा की उठाई हर बातों का साफ-साफ जवाब भी दिया और राफ-साफ कर भी दिया।
नीतीश कुमार ने भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी के बारे में कहा कि सुशील मोदी बेचारे बोलते हैं. हमको उनके बयान से कोई मतलब नहीं है. हमारे साथ राजद के लोग आए हैं तब से बोल रहे हैं. इसलिए हमको कोई लेना देना नहीं है.
बता दें कि इससे पहले उपेंद्र कुशवाहा के बयान को लेकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी नाराजगी जताई थी. न्यूज18 से बातचीत में उन्होंने कहा ता कि जदयू का कोई नेता बीजेपी के संपर्क में नहीं है. एक जो थे उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. अब ये तो उपेन्द्र कुशवाहा ही बताएं कि जदयू का कौन नेता बीजेपी के संपर्क में है.
ललन सिंह ने उपेन्द्र कुशवाहा के उस बयान पर भी पलटवार करते हुए कहा कि जदयू कमजोर हो रही है. उन्होंने कहा कि जदयू पहले से मजबूत हो रही है, और उसके सदस्यों की संख्या भी बढ़ कर 75 लाख तक पहुंच गई है. ललन सिंह ने इसके बाद उपेन्द्र कुशवाहा पर निशाना साधते हुए कहते है कि उपेंद्र कुशवाहा को ये बताना चाहिए कि वे पार्टी में मजबूती से हैं या नहीं हैं.