निगोही रोड स्थित कुष्ठ आश्रम में जिलाधिकारी ने जरूरतमंदों को कम्बल वितरित किये

शाहजहांपुर (सूवि)। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने मंगलवार की रात्रि में निगोही रोड स्थित कुष्ठ आश्रम में ठंड से बचाव हेतु जरूरतमंदों को कम्बल वितरित किये। उन्होने बताया कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में शीतलहर एवं ठण्ड से बचाव हेतु कम्बल वितरण के साथ-साथ अलाव एवं रैनबसेरे की व्यवस्था भी की गयी है। 7,000 कम्बलों का क्रय कर 4 जनवरी तक 6,000 कम्बल निराश्रित, असहाय एवं पात्र व्यक्तियों को वितरित किया गया है। स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से भी कम्बल आदि का वितरण कराया जा रहा है।
जनपद मे कुल 17 रैनबसेरा क्रियाशील है। बस स्टैंड के पास कांठ, जिला अस्पताल परिसर, नगर निगम टाउनहॉल के पास, हनुमतधाम, अजीज गंज, छोटी विसरात पक्का पुल, रोडवेज एसपीएन, नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास, एनपी खुटार, एनपी बंडा, एनपी अल्लाहगंज टंकी परिसर, एनपीपी जलालाबाद, एनपीपी तिलहर, ऑफिस नगर पंचायत के पास, एनपी कटरा के सामने, कृषि रक्षा केंद्र, एनपी निगोही कार्यालय हमजापुर, राजकीय इंटर कॉलेज कलान, इसमें से 6 रैनबसेरा नगर निगम द्वारा एवं 11 रैनबसेरा नगर पालिका/नगर पंचायत द्वारा संचालित किये जा रहे है।
उक्त रनबसेरों में लगभग 500 व्यक्तियों के ठहरने की व्यवस्था है। वर्तमान में लगभग 100 व्यक्तियों द्वारा शेल्टर होम में प्रतिदिन शरण ली जा रही है। रैन बसेरो का अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण भी किया जा रहा है। समस्त रैनबसेरों में सेनीटाइजेशन एवं कोविड नियमों का अनुपालन कराया जा रहा है। जनपद में लगभग 300 स्थान अलाव जलाये जाने हेतु चिन्हित किये गये है, जिसमें से 293 स्थलों पर प्रतिदिन अलाव जलवाये जा रहे हैं।
जिलाधिकारी द्वारा शीतलहर के दौरान कम्बल वितरण, अलाव जलाये जाने एवं शेल्टर होम की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने हेतु विभिन्न विभागों को विस्तृत निर्देश दिये गये है। उन्होने जनसामान्य से अपील करते हुये कहा है कि कोयलें की अंगीठी/मिट्टी तेल का चूल्हा/हीटर इत्यादि का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें तथा कमरें में शुद्ध हवा का आवागमन/वेंटिलेशन/वायु/संचार बनायें रखें। ठंड लगने के लक्षणों जैसे हांथ-पांव सुन्न हो जाना, हांथ पैर की उंगलियों में सफेद या नीले रंग के दाग उभर आने पर नजदीकी अस्पताल से सम्पर्क करें। शरीर को गर्म रखने के लिए पोषक आहार जैसे सूखें फल, खजूर, चाय, कॉफी, सूप आदि का सेवन करें। हाइपोथर्मिया (शरीर के असामान्य तापमान) के लक्षण जैसे याददाश्त का कमजोर पड़ना, असीमित ठिठुरना, सुस्ती, थकान, तुतलाना तथा कार्य में भटकाव इत्यादि के लक्षणों महसूस होने पर तुरन्त डॉक्टर से सम्पर्क करें। शरीर को गर्मी प्रदान करने के लिये स्वस्थ भोजन खाएं एवं पीने के लिये गैर-मादक पेय पदार्थ का प्रयोग करें। मौसम और आपातकालीन प्रतिक्रिया की जानकारी के लिए सभी मीडिया स्रोतों के माध्यम से निगरानी रखें।
सुरक्षित यातायात के सम्बन्ध में निर्देश देते हुये जिलाधिकारी ने कहा कि गन्ना तथा भूसा ढोने वाले गाडियों जैसे-ट्रॉली, ट्रक, बैलगाड़ी पर क्षमता से अधिक गन्ना न लादें। सर्दियों में गाडि़यों में फॉग लाईट का इस्तेमाल करें। गाडि़यों में आगे व पीछे रेडियम पट्टी का प्रयोग करें। भार ढोने वाले वाहन के चालक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पीछे से आ रही एम्बुलेंस को रास्ता दें। वाहन में हमेशा प्राथमिक उपचार किट अवश्य रखें। शॉल व कम्बल ओढकर वाहन न चलायें। दोपहिया वाहन चालक शीतलहर/ठंड में बहुत आवश्यक होने पर ही घर से वाहन लेकर बाहर निकलें, दोपहिया वाहन चालक शीतलहर/ठंड में बाहर निकलते समय गर्म कपउे, दस्ताने, चश्मा, हेलमेट पहन कर निकलें। दोपहिया वाहन चालक शीतलहर में वाहन को धीमें चलायें इससे खुद के साथ-साथ दूसरों को भी सुरक्षित रख सकते है।
पशुओं को ठंड से वचाव हेतु पशुओं को ठंड के समय में गुड़ व कैल्शियम टॉनिक पिलाएं पशुओं को ठंड के मौसम में जूट की बोरी अथवा घर में पड़ा पुराना कंबल उढाएं। ठंड के मौसम में पशुओं को थनैला मिल्क फीवर नेमोटाइटिस आदि रोग होने का खतरा रहता है इसलिए पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक को दिखाते रहें पशुओं को रात में खुले पेड़ के नीचे अथवा घर से बाहर न निकालें। प्रेगनेंट पशुओं को ठंड लगने की ज्यादा संभावना होती है उनके पास अलाव जलाकर रखें लेकिन यह भी ध्यान में रखें कि अलाव से पशुओं से कोई नुकसान न पहुंचे। पशुओं को ठंड के मौसम में स्नान कराने से परहेज करना चाहिए। पशुओं के नीचे बैठने वाले स्थान पर पराली/गन्ने की पत्ती जरूर डालें।

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