मोहला-मानपुर। जिले में प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया की मंशा पर प्रशासनिक उदासीनता का ग्रहण लगा हुआ है, जहां स्कूली नौनिहालों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए एक करोड़ की लागत से शुरू किए गए प्रोजेक्ट ठप हो गया है। दरअसल जिले में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता व क्षेत्रीय विकास के लिए मिलने वाले डीएमएफ यानी जिला खनिज न्यास के पैसे से प्रशासनिक हुक्मरानों ने 25-25 रुपए की लागत से जिले के चार अलग-अलग स्कूलों में हाईटेक डिजिटल क्लास रूम की स्थापना तो कर दी, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन के गैरजिम्मेदाराना रवैये ने शासन की डिजिटल शिक्षा के तमाम दावों की पोल खोल दी है।
बता दें कि जिले के चार हायर सेकेंडरी स्कूल मशलन ग्राम भर्रीटोला, दनगड़, गोटाटोला और कौड़ीकसा के हायर सेकेंडरी स्कूल में हाईटेक डिजिटल क्लॉस रूम स्थापित किया गया है। लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने जब इन चारों स्कूलों में पहुंचकर उक्त डिजिटल स्मार्ट क्लॉस रूम का अवलोकन किया तो पाया कि शासन द्वारा संजोए डिजिटल इंडिया की मंशा पर प्रशासनिक उदासीनता ने कुठाराघात कर रखा है।
धूल फांक रहे लाखों रुपए के उपकरण
आदिवासी बाहुल्य सुदूर वनांचल मानपुर अंतर्गत ग्राम भर्रीटोला के हायर सेकेंडरी स्कूल में स्थापित डिजिटल क्लॉस रूम की बात करें तो यहां का स्मार्ट क्लॉस रूम स्थापित होने के बाद से ताले की कैद में रह जाने को मजबूर है। दरअसल सत्र के आरंभ माह में इस स्कूल के एक कक्ष में टेलीविजन स्क्रीन व अन्य उपकरणों समेत फर्नीचर से युक्त स्मार्ट क्लॉस रूम स्थापित तो कर दिया गया, लेकिन डिजिटल अध्यापन का सबसे अहम हिस्सा इंटरनेट सिस्टम ही यहां नहीं लगाया। यही नहीं ऑनलाइन अध्यापन के लिए न तो कोई अध्यापक की नियुक्ति हुई और न ही इस स्कूल के किसी अध्यापक को कोई प्रापर प्रशिक्षण दिया गया। ऐसे में आज तलक उक्त डिजिटल क्लास रूम के जरिये बच्चों का प्रापर अध्यापन ही नहीं कराया जा सका है। कुल मिलाकर कहें कि लाखों की लागत के उपकरण स्थापित होने के बाद से बिना उपयोग के धूल फांक रहे हैं। डिजिटल क्लॉस रूम की स्थापना से बेहतर शिक्षा की उम्मीद पाल चुके यहां के विद्यार्थी डिजिटल शिक्षा नसीब न होने से निराश तो हैं ही बल्कि ये व्यवस्था दुरुस्त करने की गुहार भी जिम्मेदारों से लगा रहे हैं।
शिक्षक को घंटेभर की ट्रेनिंग नाकाफी
इधर बाकी के स्कूलों में भी कमोबेश बदइंतजामी का ही आलम है। ग्राम दनगड़ और ग्राम गोटाटोला के स्कूलों में स्थापित किए गए डिजिटल क्लॉस रूम के संचालन के लिए इंटरनेट सिस्टम तो लगा दिया गया है लेकिन यहां किसी भी अध्यापक को कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई, जिससे कि वे माकूल तरीके से डिजिटल क्लॉस क्रियान्वित कर सके। बिना ट्रेनिंग के कुछ जानकार अध्यापक पर्सनल इंट्रेस्ट से बच्चों की क्लॉस जरूर ले लेते हैं, लेकिन नेटवर्क की समस्या से क्लास का क्रियान्वयन उचित ढंग से नहीं हो पाता है। उक्त तीनों स्कूलों के अलावा एक मात्र हायर सेकेंडरी स्कूल कौड़ीकसा में डिजिटल क्लॉस लगाने महज करीब एक घंटे की ट्रेनिंग स्कूल के अध्यापकों को उपकरण लगाने वाली कंपनी द्वारा जरूर दे दी गई, लेकिन हाईटेक डिजिटल उपकरणों के क्रियान्वयन व उपकरणों के जरिए अध्यापन जैसे महत्वपूर्ण काम के लिए महज घंटेभर की ट्रेनिंग नाकाफी ही लगती है। हालांकि कौड़ीकसा शाला में डिजिटल क्लॉस रूम में स्थानीय अध्यापक अध्यापन जरूर करा देते हैं।
जल्द कमियों को दूर किया जाएगा : डीईओ
मानपुर जनपद पंचायत के शिक्षा समिति सभापति देवानंद कौशिक ने भर्रीटोला हायर सेकेंडरी स्कूल में बिना उपयोग के धूल फांक रहे उपकरणों को लेकर इसे डीएमएफ फंड का दुरुपयोग करार दिया है। यही नहीं चार स्कूलों में डिजिटल क्लॉस रूम की बगैर प्रशिक्षक स्थापना पर भी सवाल उठाया है। दूसरी ओर जिले के शिक्षा अधिकारी ने जल्द कमियों को दूर किए जाने की बात कही है।
