बलौदाबाजार। स्कूल में पढ़ने वाली 9 नाबालिग छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के मामले में अदालत ने शिक्षक को दोषी ठहराते हुए 6 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी पलारी थाना क्षेत्र के टीपावन स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में प्रभारी प्राचार्य के पद पर पदस्थ था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) गिर्जेश प्रताप सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने पैरवी की।
पिता का हालचाल पूछने के बहाने छात्रा को बुलाया था स्टाफ रूम
मामले में सामने आया कि आरोपी शिक्षक ने एक छात्रा को उसके पिता का हालचाल पूछने के बहाने अपने स्टाफ रूम में बुलाया था। बातचीत के दौरान उसने छात्रा की पीठ और कमर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। इसके बाद उसके सीने को छूने की कोशिश की। शिक्षक की इस हरकत से छात्रा डर गई और वहां से भाग निकली।
घटना के बाद स्कूल की एक शिक्षिका ने बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में समझाया। इसी दौरान उन्होंने छात्राओं से पूछा कि क्या किसी के साथ इस तरह की कोई घटना हुई है। इस पर पीड़िता ने अपने साथ हुई घटना की जानकारी शिक्षिका और अपनी मां को दी। इसके बाद स्कूल की अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक पर इसी तरह की हरकत करने के आरोप लगाए।
पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया था मामला
छात्राओं की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी तिलक राम वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 और 75(1), पॉक्सो एक्ट की धारा 8 और 9(f) के साथ एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v)(क) के तहत FIR दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया।
28 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) गिर्जेश प्रताप सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने अपना मामला साबित करने के लिए कुल 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान छात्राओं के साथ हुई घटनाओं से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी शिक्षक को दोषी पाया। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 75(1) के तहत 2 साल के सश्रम कारावास और पॉक्सो एक्ट की धारा 9(f) के तहत 6 साल के सश्रम कारावास के साथ जुर्माने से दंडित किया।
स्कूल जैसे संस्थान में ऐसी घटनाएं गंभीर
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने स्कूल जैसे शैक्षणिक संस्थान में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े पहलू को भी सामने रखा। अदालत का यह फैसला छात्राओं के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले में अहम माना जा रहा है। विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा की पैरवी से इस मामले में दोषसिद्धि और सजा दिलाने में अभियोजन पक्ष को सफलता मिली।
