Lok Sabha Elections : नाराज ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. ममता ने साफ-साफ कहा है कि चुनाव जीतने के बाद ही गठबंधन पर कोई बातचीत होगी. ममता के इस ऐलान के बाद इंडिया गठबंधन को झटका तो लगा ही है साथ ही देश में एक तीसरे मोर्चे की भी तैयारी शुरू हो गई है.
ममता ने कहा, “मेरी कांग्रेस के साथ कोई भी चर्चा नहीं हुई. मैंने हमेशा कहा है कि बंगाल में हम अकेले लड़ेंगे. मैंने कांग्रेस को कई प्रस्ताव दिए.लेकिन उन्होंने उन्हें खारिज कर दिया. मुझे इस बात की चिंता नहीं है कि बंगाल में क्या किया जाएगा. हम बंगाल में अकेले ही बीजेपी को हराएंगे.”
बता दें कि इंडिया गठबंधन की कई दौर की बैठक के बाद अभी तक सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर बात नहीं बन पाई है. ‘इंडी’ के अगुवा रहे नीतीश कुमार भी अब लगभग-लगभग गठबंधन से अलग ही चल रहे हैं. यूपी में अखिलेश ने पहले ही कांग्रेस की मांग के मुताबिक सीट देने से मना कर दिया है. ऐसे में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जल्द ही देश में एक अलग ही मोर्चे का निर्माण होने की संभावना है. हाल ही में जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला ने कहा था कि अगर जल्द से जल्द सीट शेयरिंग पर बात नहीं बनी तो कुछ दल अपना अलग गठबंधन बना सकते हैं.
लोकसभा चुनाव के लिहाज से तीसरा मोर्चा राजनीतिक दलों का एक ऐसा गुट होगा जो न तो कांग्रेस के साथ है और न ही बीजेपी के साथ. हालांकि, अभी तक ये फाइनल नहीं है कि इस मोर्चे में कौन-कौन सी पार्टियां हो सकती हैं और कितनी सीटों पर असर डाल सकती हैं. हालांकि, जब भी किसी मोर्चे की बात की जाती है तो यूपी के 80 सीटों को दरकिनार नहीं किया जा सकता.
उदाहरण के लिए- अगर मायावती की पार्टी बीएसपी तीसरा मोर्चा बनाती हैं तो यूपी के साथ-साथ ओडिशा की सभी 21 सीटों पर असर डालने में कामयाब रहेंगी क्योंकि उनके साथ बीजेडी भी जुड़ सकती है. पंजाब में अकाली दल का साथ भी मिल सकता है. वो इसलिए क्योंकि न तो अकाली दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा है औ न ही बीजेडी.
अगर इसके इतर तीसरे मोर्चे की बात करें तो ममता के ऐलान के बाद से राजनीतिक पंडितों का मानना है कि नीतीश, अखिलेश और ममता के बीच अगर बात बन गई तो तीसरा मोर्चा तय है. इसके बाद आने वाले लोकसभा चुनाव में इसका असर बिहार के 40, बंगाल के 42 और यूपी के 80 सीटों पर देखने को मिल सकता है. इसमें आम आदमी पार्टी के शामिल होने के भी आसार हैं. हालांकि, बुधवार को पंजाब के सीएम भगमंत मान ने भी ऐलान कर दिया कि पंजाब की सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी.
इंडिया गठबंधन से अखिलेश यादव भी खफा हैं. पिछले एक महीने से कोई भी ऐसा दिन नहीं जाता जब अखिलेश यादव ने कांग्रेस को आड़े हाथों न लिया हो. इसके लिए ज्यादा पीछे जाने की भी जरूरत नहीं है. रविवार को अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर आपको राशन के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा तो आप भाजपा को वोट क्यों देंगे? कांग्रेस को भी वोट मत देना, यह बहुत चालू पार्टी है.